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कोरोना ने लोगों के जन जीवन को तो ध्वस्त किया ही है। साथ ही पूरी दुनिया की अर्थ व्यवस्था भी घुटनों पर आ गई है दुनियाभर के शेयर बाजार धड़ाम हो चुके हैं। ना जाने कितने लोगों की नौकरियां जा रही हैं और जिनकी अगर बची भी है उनपर लगातार खतरा मंडरा रहा है। इसी बुरे समय का साथी बनेगा सोना। कोरोना संकट के दौरान 45000 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच चुका सोना आने वाले महीनों में 50 हजार के पार हो सकता है।

2019 में सोने से 25 फीसदी तक का रिटर्न मिला था

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने बताया कि कोरोना वायरस का संकट बढ़ने के साथ शेयर बाजार में अभी और गिरावट आ सकती है। जिससे निवेशक ज्यादातर सोने में निवेश बढ़ाएंगे। इसके चलते इस साल सोने में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिलेगा। केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि अक्षय तृतीया पर अगर सोना 50,000 रुपये के स्तर तक नहीं पंहुचा तो जून के आखिर तक पीली धातु का भाव 50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपर पहुंच सकता है।

उन्होंने यह भी बताया की जिस प्रकार 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान शेयर मार्किट और सोने के भाव में गिरावट आई थी, लेकिन कुछ समय बाद सोने में बहुत ज्यादा तेजी देखने को मिली थी। और 2011 में सोने का रिकॉर्ड काफी ज्यादा ऊंचाई पर जा पहुंचा। उस समय कॉमेक्स पर सोने का भाव 6 सितंबर, 2011 को 1,911.60 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था।

लॉकडाउन के बाद फिर गुलजार होगा सर्राफा बाजार

देश के सर्राफा कारोबारी देश में कोरोना वायरस की महामारी पर लगाम लगने का इंतजार कर रहे है क्योंकि 14 अप्रैल के बाद जब बाजार खुलेगा तब लोग अक्षय तृतीया की तैयारी में लग जाएंगे। और क्योकि देश में सोने की खरीदारी के लिए अक्षय तृतीया को शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस बार अक्षय तृतीया 26 अप्रैल को है। इसलिए सोने के दाम में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।