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आपको ये जानकर थोड़ी हैरानी होगी की मीर उस्मान अली ने ही भारत के पहले हवाई अड्डे का निर्माण करवाया। उस्मानिया यूनिवर्सिटी हैदराबाद की स्थापना भी उन्होंने ही की थी। इन्होंने दान देते वक़्त कभी किसी का मजहब नही पूछा इन्होंने जहाँ एक तरफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को 5 लाख रुपये दान किये वही दूसरी तरफ बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी को 10 लाख रुपये भेजे।

मीर उस्मान अली की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की उन्होंने एक टोपी और एक कम्बल में पूरी जिंदगी गुज़ार दी उन्होंने कभी सोने और चांदी के बर्तनों में खाना नही खाया।

उनके लिए एक टीन की प्लेट बनाई गयी थी जिसका उन्होंने जिंदगी भर इस्तेमाल किया। इनकी नमाजे जनाजा में 1 करोड़ से भी अधिक लोग आये निज़ाम म्यूसियम में मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक ये जनाजा दुनिया का सबसे बडा जनाजा था। मीर उस्मान अली कहाँ करते थे की जबतक में जिंदा हु भारत की तरफ कोई आंख उठा कर भी नही देख सकता।

हैदराबाद के नवाब महबूब अली खान के बेटे मीर उस्मान अली खान ने वो किया जो आजतक भारत के लिए कोई नही कर पाया। उन्होंने चीन से होने वाले युद्ध की तैयारियों के लिए जरूरी पैसों की पूर्ति करने के लिए पूरा 5 टन सोना भारत सरकार को दान कर दिया था। 1965 में दान किये गए 5 टन सोने की कीमत आज के जमाने मे करीब 1500 करोड़ रुपए होगी।

हैदराबाद के मीर उस्मान अली खान ने सामने से प्रधानमंत्री शास्त्री जी को हैदराबाद बुलाया और अपनी तरफ से 5 टन सोना ‘राष्ट्रीय रक्षा कोष’ में दान कर दिया। अगर मीर उस्मान 5 टन सोना दान ना करते तो आज भारत के बड़े हिस्से में चीन का अधिकार हो जाता।