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विनोद खन्ना का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया था. वो कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे. 6 अक्टूबर, 1946 को पेशावर (पाकिस्तान) में जन्मे इस अभिनेता ने "मन का मीत" (1968) से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. अनेक सुपरहिट फिल्में देने के पश्चात वो ओशो से जुड़े. उनसे इस कदर इंस्पायर हुए कि उनके आश्रम में 5 वर्ष गुजार दिए. वहां उन्होंने माली का कार्य किया. फिल्मों में वापसी के 10 वर्ष पश्चात उन्होंने पॉलिटिक्स में एंट्री ली. बीजेपी के टिकट पर सांसद बनने के पश्चात अटल बिहारी वाजपेयी ने उनको मंत्री भी बनाया था.

निर्माताओं के साइनिंग अमाउंट लौटाने लग गए थे विनोद

पुणे के ओशो आश्रम में उनको 31 दिसंबर, वर्ष 1975 को दीक्षा दिलाई गई थी. 70 के दशक में ये अभिनेता ओशो से इस कदर इंस्पायर हुआ कि उनकी व्यक्तिगत जीवन ही बदल गई. विनोद हर वीकेंड पुणे में ओशो के आश्रम जाया करते थे. यहां तक कि उन्होंने अपने अनेक शूटिंग शेड्यूल भी पुणे में ही रखवाए. शूटिंग के लिए भी वो कुर्ता तथा माला पहनकर पहुंचने लगे थे. धीरे-धीरे वे निर्माताओं को साइनिंग अमाउंट लौटाने लगे थे.

ओशो से जुड़ने के पश्चात उन्होंने अनेक जोड़ी सूट, कपड़े, जूते तथा दूसरे लग्जरी सामान लोगों में बांट दिए थे. वो पहले गेरुआ, तत्पश्चात आश्रम का मरून चोगा पहनने लगे. दिसंबर 1975 में इन्होने फिल्मों से अचानक ब्रेक ले लिया तथा संन्यासी बनने का निर्णय कर लिया.

ओशो यूएस के ओरेगन शिफ्ट हो गए थे. तब विनोद भी वहीं चले गए. वर्ष 1982 के पश्चात ओशो संग उनके रजनीशपुरम आश्रम में खन्ना ने लगभग 5 वर्ष गुजारे. एक साक्षात्कार मे स्वयं खन्ना ने ये बात मानी थी.

1987 से पुनः फिल्मों में की वापसी

वर्ष 1987 में डिंपल कपाडिया के अपोजिट फिल्म 'इंसाफ' के द्वारा उन्होंने बॉलीवुड में पुनः वापसी की. इसी वर्ष फिल्म 'दयावान' में एंटी-हीरो के तौर पर उनको बेहद पसंद किया गया.

उन्होंने मुकद्दर का सिकंदर (1978), सीआईडी (1990), जुर्म (1990), लेकिन.. (1990), हमशक्ल (1992), खून का कर्ज (1991), पुलिस और मुजरिम (1992), इंसानियत का देवता (1993) जैसी अनेक बेहतरीन फिल्मों में कार्य किया.

सलमान खान स्टारर फिल्म 'दबंग' सीरीज की फिल्मों में उन्होंने अहम किरदार अदा किया था. इनको अंतिम दफा निर्देशक रोहित शेट्टी की फिल्म 'दिलवाले' (2015) में देखा गया था. इस फिल्म में शाहरुख खान, काजोल, वरुण धवन तथा कृति सेनन अहम भूमिका नज़र आये थे.

1997 में पॉलिटिक्स में की एंट्री

1997 में बीजेपी का मेंबर बनने के पश्चात ये नेता भी बन गए. वो गुरदासपुर, पंजाब से बीजेपी के सांसद रहे. जुलाई 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी ने उनको संस्कृति और पर्यटन मंत्री बनाया था.

2003 में वाजपेयी ने उनको विदेश राज्य मंत्री का अहम जिम्मा भी सौंपा. इस पद पर रहते हुए इन्होने फिल्म उद्योग के द्वारा भारत-पाक के मध्य दूरियां कम करने का प्रयास किया.